About Prem aur sambandh sudhaar



श्री शुक्ले महा-शुक्ले कमल-दल-निवासे श्री महा-लक्ष्मी नमो नम:। लक्ष्मी माई सत्त की सवाई। आओ, चेतो, करो भलाई। ना करो, तो सात समुद्रों की दुहाई। ऋद्धि-सिद्धि खावोगी, तो नौ नाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई।।

हम सभी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण कई सालों के बाद आता है और चंद्र ग्रहण तथा सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना होती है.

जिसके कारण यह कुछ राशियों को शुभ फल देता है तो कुछ राशियों को अशुभ फल देता है और अगर आध्यात्मिक की दृष्टि से देखा जाए तो ग्रहण काल का समय साधकों के लिए किसी प्रकार के वरदान से कम नहीं होता है.

शत्रु नाशक मंत्र : शत्रु नाशक काली मंत्र प्रयोग विधि और कवच

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मंत्र जप के दौरान अनुशासन:- मंत्र जाप करते समय मन को एकाग्र रखें। झूठ, क्रोध more info अथवा किसी भी चिंता से दूर रहें। साधना के दौरान धूम्रपान या अन्य नशा करना भी वर्जित है।

पतने पानी करे। गुआ करे। याने करे। सुते करे।

जियति संचारे। किलनी पोतनी। अनिन्तुश्वरि करे।

साधना रात्रि के शान्त वातावरण में करें। 



साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन अवश्य करें।

जप काल में भोग आदि सामग्री, फल-फूल, मिठाई आदि ताजा एवं शुद्ध होनी चाहिए।

हर मंत्र की प्रत्येक विधि होती है, उसी का पालन करें।

साधना के लिए एकांत और शुद्ध स्थान का उपयोग करें। 

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